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   इतिहास में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति अलबट आइंस्टाइन ।

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  20मी सदी के अलबट आइंस्टाइन पारंभीक 30 वर्षों तक विश्व के वैज्ञानिक जगत पर साऐ रहे । उन्होंने अपने खोजो के आधार पर अंतरिक्ष, समय और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान पर किये। वह इतने महान और लोगपिय इंसान थे कि जब भी वो बहार घुमने निकलते तो लोग उन्हें सड़क पर रोक कर उनके दिऐ गऐ सिंधान्  की व्याख्या पुछने लगते, जिसके चलते उन्होंने निरंतर पुछताछ से बचाने के का एक तरीका निकाला। जिसमें वे उन सब लोगों से माफ किजिऐ मुझे अक्सर लोग पो्फेसर आइस्टाइन समझ लेते है। पर वह में नहीं हुं। दोस्तों वह हमेशा कहते थे मेरे अंदर कुच खास गुन नहीं है। मे तो केवल एक ऐसा व्यक्ति हुं, जिसमें जिज्ञासा कुट-कुट कर भरी हुई है। लेकिन दोस्तों आपको जानकर हेरानी होगी की अलबट आइस्टाइन हमेशा से इतने बुद्धिमान नहीं थे। बल्कि उनके बचपन मे तो इनकी पढाई में बहुत कमजोर होने की वजह से उनको मनबुध्धि भी कहा जाने लगा। हे ना यह केतने हेरान करने वाली बात। लेकिन यह तो कुच भी नहीं है। क्योंकि इसके अलावा भी बहुत सी ऐसी बातें है, जिन्हें जानकर आप हेरानीयो से भर जाएगें।तो अगर सच में जानना चाहते हो की कैसे अलबट आइस्टाइन एक मनबुध्धि बालक से सदी के सबसे जीनीयस वैज्ञानिक बने। तो इस पोस्ट को पूरा पढे।

   अलबट आइस्टाइन का जन्म 14 मार्च सन 1879 को  जर्मनी के एक यहूदी परिवार में हुआ था। उनके पति का नाम अरमन आइस्टाइन और माता का नाम क्वोलिन आइस्टाइन था। दोस्तों जब वह पैदा हुऐ थे, तो उनके अंदर एक अनोखी चीज थी।जो उनको किसी भी और सामान्य बच्चे से अलग बनाती थी। क्योंकि उनका सीर सामान्य बच्चे से कइ ज्यादा बदा था। और जैसे- जैसे वह थोदे बदे होने लगे तो उनको सुरू-सुरू में बोलने में भी कठिनाई होती थी। और लगभग चार साल के उम्र तक अलबट आइस्टाइन कुच भी नहीं बोल पाऐ। मगर एक दिन वह अपने माता-पिता के साथ खाने पर बैठे थे, तो उन्होंने चार साल की चुप्पी तोडते हुए कहाँ की सुप बहुत गर्म है। अपने बेटे के एकदम बोलने से आइस्टाइन के माता-पिता हेरान रह गए और बहुत खुश हुए। दोस्तों बचपन मे आइस्टाइन को अपने उम्र के बच्चों के साथ खेलना बिलकुल पसंद नहीं था।ओर उन्होंने अपने ही एक अलग दुनिया बना रखी थी,क्योंकि वह हमेशा पेड़ पौधे ओर इस ब्रह्मांद के  बारे में सोचते रहते थे। उनके मन में हमेशा ये बात रहती थीं की आखीर यह दुनिया कैसे चलती हैं । आइंस्टाइन के मन के भीतर वैज्ञानिक प्रति रुचि तब पैडा हुई जब उनकी उम्र 5 साल की थीं ।ओर उनके पिता उन्हें एक मैगनेटिक कंपस लाके दिया था ।जिसे देखकर आइस्टाइन बहुत खुश हुए थे । लेकिन जब उस मैगनेटिक कंपस की सुई हमेशा उत्तर की तरफ रहती तो उनके दिमाग में हमेशा एक सवाल रहता था, कि ऐसा कैसे ओर क्यूं होता है ।अपने बोलने की कठिनाई के कारण उसने स्कूल काफी देर से सुरू किया ओर आपको जानकार हैरानी होगी कि उन्हें स्कूल एक जेल की तरह लगती थी । क्योकि उनके अध्यापक द्वारा पढ़ाई गई चीजें आधी-अधूरी लगती थी ।वह समझने से ज्यादा किताबी ज्ञान को रतना सिखाते थे,ओर इसीलिए वह अपने अध्यापकों से अजीब-अजीब सवाल पूछा करते थे । इसलिए अध्यापकों ने उसे अनुबद्धी कहना शुरू किया था । ओर दोस्तों बार-बार मनुबद्धी कहे जाने के कारण आइंस्टाइन को यह अहसास होने लगा कि उनकी बुद्धि विकसित नहीं हुई, और इसलिए एक बार उन्होंने अध्यापक से पूछा की में अपने बुद्धि को विकास कैसे कर सकता हुं।अध्यापक ने एक लाइन में जवाब दिया कि अभ्यास ही सफलता का मुल मंत्र है।अध्यापक की यह बात आइंस्टाइन के मन में घर कर गई ओर उस दिन से उन्होंने ये निश्चिंत कर लिया कि एक दिन सबसे आगे बढकर दिखाएगा । ओर उस दिन के बाद आगे बढ़ने की लगन उस पर हावी हो गई । उसे पढ़ने में मन नहीं लगता था फिरभी वह अपने हाथ से किताब नहीं सोदते थे। वह हमेशा अपने मन को समझाते ओर वापस पढ़ने लगते । ओर कुच ही समय में उनके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा। जिसे देखकर उसके अध्यापक भी इस विकास से तंग रह गऐ। आगे चलकर आइंस्टाइन गणित जैसी विषय को पसंद कीया,लेकिन दोस्तों आर्थिक स्थिति में कमज़ोर होने की वजह से उनकी आगे की पढ़ाई कमज़ोर हुई । आइंस्टाइन सोख ओर मौज में एक पैसा भी खर्च नहीं करते थे । चलिए उससे जुड़े एक मशहूर किस्सा आपको बताता हूँ । एक दिन की बात थी, जब बहुत जोर से बारिश हो रही थी। ओर आइंस्टाइन अपने बगल में हेट छुपाकर जल्दी- जल्दी घर की तरफ जा रहे थे । उसके पास छाता न होने के कारण भीग गऐ थे। रास्ते में एक संज्जन मिला उसने आइंस्टाइन को पूछा, भाई इतनी तेज बारिश हो रही है, हेट को सिर पे धकने के बजाय तुम उसे बगल में दबाकर ले जा रहे हो। क्या तुम्हारा सिर भीग नहीं रहा है। तो उसी बात पर आइंस्टाइन ने कहा । भीग तो रहा है लेकिन बाद में सुक जाऐगा लेकिन हेट गीला हुआ तो खराब हो जाऐगा ओर नया हेट खरीदने के लिए ना तो मेरे पास पैसा है ना तो समय है ।

   दोस्तों अपने कठिन परिश्रम ओर अभ्यास की मदद से आइंस्टाइन ने भौतिक विज्ञान में महारत हासिल करली।ओर दोस्तों शिक्षा को लेकर उनका यह विचार था कि शिक्षा वो है की आपकों तब भी याद रहे जब आप सबकुछ भुल गऐ हो जो आपको याद था ।ओर समज के साथ साथ वह इतने बुद्धिमान हो गऐ।सन 1921 में प्रकाश विद्युत उत्पादन के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया । सन 1952  में अमेरिका ने आइंस्टाइन को इजरायल का राष्ट्रपति बनने की पोसकर की  परंतु आइंस्टाइन ने वह प्रस्ताव ये कहकर ठुकरा दिया कि वे राजनीति के लिए नहीं बने। अलबट आइंस्टाइन इतने बुद्धिमान थे कि वह अपने माइन में ही पुरी रिसर्च को सोच कर पुरा प्लान कर लेते थे ।जो उसके लेब से ज्यादा सचीत होता था ओर इसीलिए हिस्ट्री के सबसे जीनियस व्यक्ति कहलाऐ । इसीलिये 14 मार्च को पुरी दुनिया में जीनियस डे के रूप में मनाया जाता है ।लेकिन दोस्तों अलबट आइंस्टाइन का यह मानना था की धरती पे जन्मे वो प्रत्येक व्यक्ति जीनियस हैं ।आइंस्टाइन बहुत सारी गलतियां करते थे । उनका कहना था जो व्यक्ति गलती नहीं करता वह कभी सीख नहीं पाते हैं ।

   अलबट आइंस्टाइन के किस्से


 >>  एक बार एक सहकर्मीने अलबट आइंस्टाइन से उनका टेलीफोन नंबर पूछा तो वह पास रखी टेलीफोन डायरेक्टरी में अपना फोन नंबर ढूंढने लगे सहकर्मी चकित होकर पूछा आपको अपना फोन नंबर भी याद नहीं है । तो आइंस्टाइन ने कहा वो सब में क्यूं याद रखु जो मुझे आसानी से किताब में ढूंढने से मिल जाता है ।

 >>  जब क्रिस्टीन युन्र्वसीटी में कार्यरत थे तो एक दिन क्रिस्टीन युन्र्वसीटी से आते समय वह अपना घर का ऐद्भुस ही भुल गऐ । क्रिस्टीन के ज्यादातर लोग आइंस्टाइन को जानते थे । तो उसने टैक्सी ड्राइवर को पूछा की क्या आप आइंस्टाइन को जानते हैं ।टैक्सी ड्राइवर ने कहा अगर आप मिलना चाहते हो तो मे उसके घर ले जा सकता हुं । टैक्सी ड्राइवर अलबट आइंस्टाइन को कभी नहीं देखा था ।तब उन्होंने  कहा कि मैं ही आइंस्टाइन ओर मे अपने घर का ऐद्भुस भुल गया हुं । टैक्सी ड्राइवर ने उसे घर पहुँचाया  तब आइंस्टाइन ने टैक्सी का भांडा देना चाहा लेकिन टैक्सी ड्राइवर ने साफ़ मना कर दिया ।

 >>  एक बार आइंस्टाइन ट्रेन से कहीं जा रहे थे ।जब टिकट चेकर्स आया तो वह अपने जेब टटोलने लगे जेब में टिकट नहीं मिला तो वह सूटकेस में देखने लगे ओर आसपास ढूंढने लगे । टिकट चेकर्स आइंस्टाइन को अच्छी तरह से जानते था । उसने आइंस्टाइन को कहा कि आपने टिकट जरूर खरीदी होगी । नहीं मिले तो आप रहने दें । टिकट चेकर्स दूसरे लोगों का टिकट चेक करने लगा ।आइंस्टाइन फिर भी टिकट ढूंढ रहा था । टिकट चेकर्स ने वापस आकर आइंस्टाइन से कहा कि आप परेशान ना हो आपसे टिकट नहीं मांगा जाएगा । चेकर्स की यह बात सुनकर आइंस्टाइन ने कहा की टिकट के बगैर मुझे पता कैसे चलेगा कि मैं कहाँ जा रहा हूँ ।

   18 अप्रैल सन् 1955 को महान वैज्ञानिक अलबट आइंस्टाइन की 76  साल की उम्र में मृत्यु हो गई । अपने लाइफ में सेकडो किताबें ओर लेंक प्रकाशित किए ।दोस्तों आज जो हम दैनिक जीवन में इन्टरनेट सेटेलाईट जैसी कई  आविष्कारों को अलबट आइंस्टाइन का महान योगदान है । लेकिन दोस्तों अलबट आइंस्टाइन को दुख तब हुआ था जब उसके वैज्ञानिक आविष्कार से परमाणु बम का आविष्कार किया गया ओर उसकी वजह से हिरोशिमा ओर नागासाकी जैसा नगर बरबाद हो गए थे ।


  दोस्तों उसने दिखा दिया कि एक अनुबद्धी लड़का भी अपने मेहनत, लगन ओर परिश्रम के बल पर संसार में कुच भी कर सकता है ।


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